स्वार्थ का मुखौटा
किसी को कौन कब यहाँ पहचानता है
स्वार्थ का मुखौटा हर कोई पहनता है
मुँह फ़ेर कर निकल जाते हैं देखते ही
बस अगले-पिछले बदले निकालता है।
किसी को कौन कब यहाँ पहचानता है
स्वार्थ का मुखौटा हर कोई पहनता है
मुँह फ़ेर कर निकल जाते हैं देखते ही
बस अगले-पिछले बदले निकालता है।