रोशनियाँ अंधेरों में भटक रही हैं

देखना ज़रा, आज रोशनियाँ अंधेरों में भटक रही हैं

पग-पग पर कंकड़-पत्थर हैं, पैरों में अटक रही हैं

अंधेरे मिले सही से, रोशनियों ने राह दिखाई

जीवन की गति इनकी ही पहचान में सटक रही है