कोहरे में छिपी ज़िन्दगी

कोहरे में छिपी ज़िन्दगी भी तो आनन्द देती है

भीतर क्या चल रहा, सब छुपाकर रख देती है

कभी सूरज झांकता है, कभी बूँदे बहकती हैं

मन के भावों को परखने का समय देती हैं।