रोशनियाँ खिलती रहें

कदम बढ़ते रहें, जीवन चलता रहे, रोशनियाँ खिलती रहें

शाम हो या सवेरा, आस और विश्वास से बात बनती रहे

कहीं धूप खिली, कहीं छाया, कहीं बदरी छाये मन भाये

विश्राम क्या करना, जब साथ हों सब, खुशियाँ मिलती रहें