दर्द का अब घूँट पिये

पुण्य करने गये थे, अपनों को साथ आस लिए

हाथ छूटे, साथ छूटे, कितने रहे, कितने जिये

नाम नहीं, पहचान नहीं, लाखों की भीड़ रही

अपनों को कहाँ खोजें, दर्द का अब घूँट पिये