नई आस नया विश्वास

एक चक्र घूमता है जीवन का।

उर्वरा धरा

जीवन विकसित करती है।

बीज से अंकुरण होता है

अंकुरण से

पौधे रूप लेने लगते हैं

जीवन की आहट मिलती है।

डालियाँ झूमती हैं

रंगीनियाँ बोलती हैं

गगन देखता है

मन इस आस में जीता है,

कुछ नया मिलेगा

जीवन आगे बढ़ेगा।

मानों धन-धान्य

बिखरता है इन डालियों में,

पुनः धरा में

और अंकुरित होती है नई आस

नया विश्वास।